भोपाल में NGT नियमों की अनदेखी
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |
Bhopal-Sewage-Water-Vegetable-Farming-NGT-Action
भोपाल में NGT प्रतिबंधों की अनदेखी कर सीवेज और नालों के पानी से सब्जी उत्पादन, मानव अधिकार आयोग ने जांच के आदेश दिए।
दूषित पानी से की जा रही खेती से खाद्य सुरक्षा और आम नागरिकों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
Bhopal/ मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की सख्त पाबंदियों के बावजूद सीवेज और नालों के दूषित पानी से सब्जियों की खेती की जा रही है। यह मामला सामने आने के बाद राज्य मानव अधिकार आयोग ने संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। आयोग ने इसे आमजन के स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए बड़ा खतरा बताया है।
भोपाल के आसपास के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में नालों और सीवेज के पानी से सब्जियां उगाए जाने का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। यह गतिविधि न केवल NGT के निर्देशों का उल्लंघन है, बल्कि खाद्य सुरक्षा और जनस्वास्थ्य के लिहाज से भी बेहद खतरनाक मानी जा रही है।
राज्य मानव अधिकार आयोग ने इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और भोपाल कलेक्टर को जांच कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। आयोग का कहना है कि यदि दूषित पानी से उगाई गई सब्जियां बाजार में पहुंचती हैं, तो इससे आम नागरिकों के स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं।
इस बीच, भोपाल में जल गुणवत्ता की निगरानी को लेकर आयोजित की जाने वाली जल सुनवाई व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। वार्ड कार्यालयों में आयोजित इन सुनवाइयों में आम लोगों की भागीदारी बेहद कम बताई जा रही है। कर्मचारियों का दावा है कि अभी तक किसी भी वार्ड में औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई, जबकि जमीनी हालात इससे बिल्कुल अलग हैं।
सूत्रों के अनुसार, जल गुणवत्ता की जांच के लिए घर-घर जाकर पानी के सैंपल लिए गए, लेकिन यह जिम्मेदारी उन्हीं कर्मचारियों को सौंपी गई जो पानी की आपूर्ति करते हैं। इससे पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। सैंपल को जांच के लिए लैब भेजने की बात कही जा रही है, लेकिन रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।
राजधानी के अशोका गार्डन क्षेत्र में दूषित पानी की समस्या अभी भी बनी हुई है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कई बार शिकायत के बावजूद प्रशासन ने ठोस कार्रवाई नहीं की। हालात से मजबूर होकर कुछ परिवारों को अपने खर्च पर बोरिंग करानी पड़ी।
रहवासियों का कहना है कि नालों से आने वाला काला और बदबूदार पानी आज भी सप्लाई लाइन में मिल रहा है, जिससे त्वचा रोग, पेट संबंधी बीमारियों और संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। अब सबकी निगाहें मानव अधिकार आयोग की रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।